कीस बात की सजा दे रहे हो निर्दोषों को
ना कहेदो उन लोगो को जो नफ़रत के जाम पिलाते है
जो गलत राह पर ले जा रहे है मासूमो को
कोसो दूर है खुदा से और शैतान से हाथ मिलाते है
यु ही नहीं होती बरसात आसमान से
वो तो खुदा के आसू है जो बाढ़ लाते है
जरा सोचो उन विधवा माताओ और अनाथ बालको की दास्तान
भगवान भी न करेगा माफ उसे जो इंसान को इंसान से लड़ाते है
नही देख सकता वो बम का विस्फोट कोइ धर्म को
हीन्दु हो या मुस्लीम सबके होश उड़ जाते है
चंद महत्वाकांक्षी लोगो के जाल में मत फसो तुम
वो तो लाश को बनाके मझाक , उस पर पकवान बनाते है
मत करो परिक्षा हमारी सहनशीलता की
एक हाथ घायल है फिरभी अमन की आस लागाते है
कोई भी ताकत प्रेम से बड़ी नही होती
नफ़रत तो आंधी और तूफ़ान लाते है
No comments:
Post a Comment